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पुण्यतिथि विशेष: काशी में बंगाली ड्योढ़ी था नेताजी का ठिकाना, पहली बार पिता के साथ आए थे मौसी घर

Sun, 18 Aug 2024 04:51 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Death Anniversary of Netaji Subhash Chandra Bose : काशी में बंगाली ड्योढ़ी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का ठिकाना था। नेताजी पहली बार बचपन में पिता के साथ चौखंभा स्थित अपने मौसी के घर आए थे। 
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बंगाली ड्योढ़ी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस का काशी से गहरा नाता था। बचपन से ही वे चौखंभा मोहल्ले की बंगाली ड्योढ़ी आते-जाते रहे। काशी में बंगाली ड्योढ़ी नेताजी का मुख्य ठिकाना था। यहां उनकी मौसी रहती थी। चौखंभा स्थित इस मकान का एक बड़ा हिस्सा बिक चुका है। अभी भी आधे से ज्यादा हिस्सा बचा हुआ है। इस समय उक्त मकान में लगभग तीस किरायेदार रहते हैं। भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार से प्राप्त दस्तावेज के अनुसार नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू के सैन्य अस्पताल में हुई थी।

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नेताजी ने जब स्वतंत्रता समर में कूदे थे तब से वे कई बार गोपनीय तरीके से काशी आए। कांग्रेस से अलग होने के बाद एक बार टाउनहॉल में नेताजी को एक सभा को संबोधित करना था। नेताजी को काशी आने में काफी रात हो गई। जब नेताजी टाउनहॉल पहुंचे तो लोग जा चुके थे। मगर, जैसे ही लोगों को पता चला कि नेताजी काशी आ गए हैं तो रात में ही उनका संबोधन सुनने के लिए हजारों लोग मैदागिन स्थित टाउनहॉल मैदान पहुंच गए थे।

काशी के क्रांतिकारियों पर शोध कर रहे नित्यानंद राय ने बताया कि नेताजी कई बार बंगाली ड्योढ़ी आए थे। वह पहली बार अपने पिता के साथ आए थे। नित्यानंद राय बताते हैं कि चौभंखा स्थित उक्त मकान का नंबर सी 4/22 है। यह मकान सुभाष बाबू की मौसी का था। यह मकान साधारण नहीं किलेनुमा था। उनके मौसी का मकान इतना बड़ा था कि कभी इसका पूर्वी छोर सिंधिया घाट तक सटता था।

मकान की विशालता और किलेनुमा बनावट नेताजी को बेहद पंसद थी। इसलिए वे यहां गुप्त रूप से रहना पसंद करते थे। इस मकान की एक खासियत यह है कि काशी में दुर्गा पूजा की शुरूआत इसी मकान में हुई थी। नेताजी के रिश्तेदार वीरभद्र मित्रा ने बताया कि उनके मौसा पेशे से बैरिस्टर थे। वह बनारस कचहरी में वकालत करते थे। भारत कला भवन में आजाद हिंद फौज के रुपये, मालवीय जी को नेताजी द्वारा लिखा हुए पत्र समेत कई निशानियां संग्रहित हैं।
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भगवार राम से अवतरित होने की लगाई थी गुहार

बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय व संजय भट्टाचार्य बताते हैं कि सनातन धर्म को बचाने के लिये श्री राम से अवतरित होने की नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने गुहार लगाई थी। भगवान राम का आवाहन कर देश की आजादी की लड़ाई में कूद गए थे। सुभाषचंद्र बोस ने अपनी मां को लिखे पत्र में कहा था कि शांति तो तभी मिल सकती है जब हम भगवान के ध्यान में डूबें और भगवान की पूजा करें। अगर इस धरती पर किसी भी प्रकार से शांति आनी है तो वह इसी तरह आएगी कि प्रत्येक घर में भगवान का भजन कीर्तन गूंजे। भारत भूमि भगवान को बहुत प्यारी है। हे भगवान भारत क्या था और आज पतन के किस गर्त में पहुंच गया है? क्या तुम अब भी आकर इसका उद्धार नहीं करोगे? यह तुम्हारी ही भूमि है लेकिन देखो प्रभु आज उसकी दशा कैसी है? कहां है वह सनातन धर्म जिसकी स्थापना तुम्हारे वरद पुत्रों ने की थी? वह धर्म और वह राष्ट्र जिसकी स्थापना और जिसका निर्माण हमारी पूर्वज आर्यों ने किया था आज धूलि धूसर है। करुणाकर हम पर दया करो और हमें बचाओ।
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