भाइयों की उम्र व आय ज्यादा नहीं थी। ऐसे में ससुराल से लगातार दी जा रही प्रताड़ना उसके लिए असहनीय थी।
सोनभद्र जिले में 8 वर्ष पूर्व नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ हुए दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनभद्र निहारिका चौहान की अदालत ने गुरुवार सजा सुनाई। दोष सिद्ध पाकर दोषियों राजेंद्र उर्फ राजेंदर व रमेश को 10 वर्ष की कैद 40 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के पिता ने एक सितंबर 2014 को ओबरा सीओ को तहरीर दी थी कि उसकी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी 24 अगस्त 2014 को शाम 6-7 बजे से गायब है। जब से बेटी गायब है तभी से विंढमगंज थाना क्षेत्र के फुलवार गांव निवासी राजेंद्र उर्फ राजेंदर भी घर से गायब है।
इस तहरीर पर चोपन पुलिस ने अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया। विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर न्यायालय में राजेंद्र व रमेश के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोष सिद्ध पाकर दोषी राजेंद्र उर्फ राजेंदर और रमेश को 10-10 वर्ष की कैद एवं 40-40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं नीरज कुमार सिंह एडवोकेट ने बहस की।