वाराणसी। सोहति सीय राम कै जोरी, छबि सिंगारु मनहु एक ठोरी। सखीं कहहिं प्रभु पद गहु सीता, करति न चरन परस अति भीता अर्थात सीताराम की जोड़ी ऐसी सुशोभित हो रही है मानो सुंदरता और शृंगार रस एकत्र हो गए हों। सखियां कह रही हैं सीते स्वामी के चरण छूओ, किंतु सीता अत्यंत भयभीत हुईं, उनके चरण नहीं छूतीं।
यह नजारा रविवार को श्री काशी सत्संग मंडल की ओर से श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित श्रीरामकथा के दौरान श्रीराम विवाह उत्सव में हर किसी ने महसूस किया। शहनाई की धुन पर श्रीराम के विवाह में पुष्पों की वर्षा श्रद्धालुओं ने की। महिलाओं को शृंगार का सामान वितरित किया गया। राम विवाह के अवसर पर आठ पटाखे बजाए गए। मुख्य अतिथि राज्य मानवाधिकार गुजरात के अध्यक्ष न्यायमूर्ति कौशल जयंत ठाकुर ने समाज के हर वर्ग में बेहतर काम करने वालों को श्री काशी विश्वनाथ मानस ज्ञान रत्न से सम्मानित किया। 40 बटुकों को काशी रत्न से सम्मानित किया गया। आचार्य सूर्य लाल शास्त्री के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में सभी अतिथियों को चांदी के सिक्के उपहार के रूप में दिए गए। कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र कुमार पाठक ने अतिथियों को सम्मानित किया। विशिष्ट अतिथि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र तिवारी और सूर्यकांत त्रिपाठी उपस्थित रहे। इस दौरान गोपीनाथ सेठ, प्रकाश पांडेय, सुनील शर्मा, नवीन पाठक, ब्रजेश उपाध्याय, शक्ति सिंह, विवेक पांडेय मौजूद थे।