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श्रीमद्भागवत प्रेम व भक्ति का सार : आचार्य तुंगनाथ त्रिपाठी

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आचार्य तुंगनाथ त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का सार प्रेम और भक्ति है। भगवान प्रेम के अधीन रहते हैं। प्रेम-परमात्मा को प्रकट करता है। श्रीमद्भागवत कृष्ण का स्वरूप है तो उसका सार प्रेम स्वरूपा राधा रानी है। करौंदी स्थित महामना नगर कालोनी में श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर मंगलवार को उन्होंने भागवत में सुदामा चरित्र अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। सुदामा दरिद्र नहीं, वह समदर्शी हैं, सुख-दुख दोनों में समान रहते हैं। अंत में सुकदेव ने संपूर्ण भागवत सार नाम और प्रणाम को बताया। व्यासपीठ का पूजन व आरती जामवंती देवी और अविनाश श्रीवास्तव ने किया।
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