बीएचयू में महिलाओं के सशक्तीकरण के विशेष संदर्भ में श्रीमद्भागवतगीता और सामाजिक समावेशन पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी की गई। अध्यक्षता समाजशास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. आरएन त्रिपाठी ने की। मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने कहा कि आज भी समाज का एक बहुत बड़ा तबका उन्हें वह सम्मान नहीं देता जिसकी वह पात्र हैं। जिस तरह हम अपने घर में अपनी मां और बहन को सम्मान देते हैं वैसा ही सम्मान हमें दूसरी स्त्रियों को भी देना चाहिए। यही श्रीमद्भागवत गीता हमें सिखाती है। भारतीय चरित्र निर्माण संस्थान के निदेशक आचार्य राम कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि आज की युवा शक्ति श्रीमद्भागवत गीता पढ़े और उसके मर्म को समझे। प्रो. आरएन त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमद्भागवतगीता में ज्ञानी ब्राह्मण, स्त्री यहां तक की चांडाल और कुत्ते को भी बराबर का दर्जा दिया गया है, क्योंकि सब में ईश्वर का वास है। आप जैसा अपने लिए चाहते हैं वैसी ही दृष्टि दूसरों के लिए भी रखें यही गीता का मुख्य उद्देश्य है। 5162 साल पहले युद्ध क्षेत्र में कही गई भगवतगीता जीवन में जो क्लेश उसको दूर करने के लिए श्रेयस्कर ग्रंथ है। निदेशक प्रो. कुम्हरैया दशरथ कुमार शर्मा और संचालन डॉ. ममता ने किया।