शिवमहापुराण के प्रसंग के अनुसार धरती पर मनुष्य के संताप को देखकर माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा था कि आप ऐसा कुछ उपाय क्यों नहीं करते हैं कि मनुष्य को बार-बार जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाए। तब भगवान शिव ने कहा कि धरती पर ही कर्म का फल हर मनुष्य को भुगतना पड़ता है। जब तक कर्म का चक्र पूरा नहीं होगा तब तक उसे जन्म-मृत्यु के चक्र से गुजरना ही पड़ेगा। मगर माता पार्वती अपनी बात पर अड़ी रहीं।
उन्होंने कहा कि कोई तो ऐसा उपाय होगा, जिससे उनको कर्म के बंधन को तोड़ा जा सके। तब भगवान शिव ने कहा कि अगर ऐसा कोई कर सकता है तो वह मेरे इष्ट भगवान राम ही हैं। फिर उन्होंने कहा कि जो कोई काशी में मृत्यु को प्राप्त करेगा और उसका महाश्मशान मणिकर्णिका पर दाह संस्कार किया जाएगा तो दाह संस्कार के पूर्व मैं उसके कान में रामनाम रूपी तारक मंत्र का उच्चारण करूंगा। लेकिन, मेरी भी एक शर्त है कि जिस वक्त मैं उसे यह तारक मंत्र प्रदान करूंगा, मेरे वामांग में आपको उपस्थित रहना पड़ेगा, तभी यह तारक मंत्र फलित होगा।
क्या कहते हैं विद्वान
- काशी में पंचक्रोशी परिक्षेत्र में मृत्यु होने पर व्यक्ति को मुक्ति मिलती है। दूसरे शहरों में मृत्यु के बाद यहां गंगा में उनकी अस्थियां विसर्जित करने या श्मशान घाटों पर दाह संस्कार करते हैं तो भी उसे मुक्ति मिलना तय हो जाता है। ऐसा पुराणों व शास्त्रों में कहा गया है। - प्रो. नागेंद्र पांडेय, अध्यक्ष, काशी विश्वनाथ न्यास परिषद
- काशी मुक्ति नगरी के साथ श्रीरामचरितमानस ग्रंथ का प्रमाणीकरण का आधार बनी। सत्यम्, शिवम् और सुंदरम् की भूमि भी काशी है। यही वजह है कि यहां महान संतों ने तपस्या की और सिद्धि प्राप्त की। - रामनारायण द्विवेदी, महामंत्री, काशी विद्वत परिषद
- काशी नगरी में भगवान शिव बैठकर रामनाम के जरिये ही मरने वालों को मुक्ति करते हैं। श्रीरामचरितमानस में भी इसका वर्णन है। कहा गया है कि काशी मुक्ति, ज्ञान की खान और पापों का नाश करने वाली नगरी है। - बालक दास महाराज, महंत पातालपुरी मठ