श्रौत यज्ञ प्रक्रिया का निरीक्षण करते हुए दक्षिणाम्नाय कांची शंकराचार्य पीठ के प्रतिनिधि स्वा
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और श्रीकाशी तारक ब्रह्मेंद्र विद्यामठ शिवाला घाट की ओर से वैदिक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित श्रौत याग–अनुष्ठान कार्यशाला का समापन मंगलवार को हुआ। सात दिवसीय कार्यशाला में छात्रों ने वेदों को प्रायोगिक बनाने के साथ ही अनुष्ठान, मंत्र और यज्ञ की परंपराओं के बारे में जानकारी ली। भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के प्रधान गवेषक डॉ. ज्ञानेंद्र सापकोटा के संयोजकत्व में वैदिक परंपरा के विद्वान आचार्यों ने श्रौत याग-अनुष्ठानों की सैद्धांतिक व प्रायोगिक विधियों का विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने कहा कि श्रौत परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण हम सबका सामूहिक दायित्व है। भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के वर्तमान समन्वयक प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, कांची शंकराचार्य पीठ के काशी के प्रतिनिधि अमृतानंद सरस्वती, शेखर द्राविड घनपाठी, डॉ. विजयकुमार शर्मा, डॉ. दुर्गेश पाठक पे विचार रखे।