भागवत भूषण आचार्य पुंडरीक शास्त्री ने कहा कि भगवान शंकर की महिमा अपरंपार है। वह अपने भक्तों पर सदा प्रसन्न रहते हैं और भगवान शिव ऐसे देवता हैं जो मात्र एक लोटा गंगाजल और बेलपत्र से प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। काशी खंड में वर्णन है कि अगर आप कुछ ना कर पा रहे हैं तो सिर्फ भगवान राम का नाम ही ले रहे हैं तो उन पर भी भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। वह शनिवार को अस्सी स्थित मारवी सेवा संघ में चल रहे शिवमहापुराण कथा के अंतिम दिन कथा का रसपान करा रहे थे। पुंडरीक शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव के आराध्य देव भगवान राम हैं। स्वयं भगवान शिव दिन रात 24 घंटे भगवान राम का नाम लेकर कीर्तन करते रहते हैं। वह हमेशा राम के धुन में ही रमे रहते हैं। यजमान राव प्रहलाद सिंह व गायत्री देवी ने शिवमहापुराण पोथी की आरती कर प्रसाद वितरण किया।