सऊदी अरब से वह दुबई का रुख कर गया। राशिद नसीम जानता था कि उसके फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ जरूर होगा, इसलिए देश छोड़ने से पहले उसने विदेशी लेनदेन के लिए अधिकृत गुजरात की एक कंपनी के जरिये 30 करोड़ से ज्यादा रुपये सुरक्षित तरीके से अपने करीबियों के बैंक अकाउंट में विदेश भेजवा दिया।
जांच एजेंसियों से जुड़े अफसरों का कहना है कि प्रमाण इसके भी मिले हैं कि देश छोड़ने से पहले राशिद नसीम ने हवाला के जरिये भी तगड़ी रकम अपने करीबियों के पास विदेश भेजी थी। फिलहाल अलग-अलग एजेंसियों की जांच जारी है। राशिद नसीम को देश वापस लाए जाने का इंतजार है।
शाइन सिटी कंपनी के संचालकों ने वाराणसी के अलावा लखनऊ, प्रयागराज और गाजियाबाद में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी थी। अब तक की जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, कंपनी के संचालकों और उनके करीबियों के नाम पर वाराणसी में राजातालाब, बाबतपुर, शिवपुर और रामनगर क्षेत्र में जमीन है। अब अदालत के आदेश से चिह्नित इलाकों में स्थित शाइन सिटी कंपनी की जमीन कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शाइन सिटी के निदेशक आसिफ नसीम से पूछताछ में सामने आया कि राशिद नसीम पहले से ही निर्धारित कर रखा था कि फर्जीवाड़े से मिले पैसे में कहां और कितना खर्च करना है। आसिफ ने बताया कि किसी कस्टमर से यदि सौ रुपये मिलते थे तो उसमें 35 से 40 फीसदी तक ऑफिस स्टाफ, ऑफिस मेंटेनेंस, एजेंट, क्लाइंट मीटिंग, साइट और पार्टी आदि पर खर्च होते थे। शेष पैसे में से राशिद नसीम खुद के लिए बचत करने के साथ ही जमीन में भी निवेश करता था। आसिफ नसीम ने बताया कि कंपनी के शुरुआती दौर में हमारा उद्देश्य ऐसा नहीं था कि देश छोड़ने और जेल जाने की नौबत आएगी। लेकिन, अंधाधुंध पैसा आने लगा तो फिर हम लोग धोखाधड़ी खुलकर करने लगे।