- भगवान शिव के त्रिशूल, परशु, तलवार और धनुष का हुआ पूजन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। विजयदशमी पर पहली बार श्री काशी विश्वनाथ धाम में शैव शस्त्रों का पूजन हुआ। शस्त्र पूजन से शस्त्रों के प्रति सम्मान और उन्हें धर्म, सुरक्षा और सद्भावना के लिए उपयोग करने की प्रेरणा भी दी गई। इसके साथ ही बाबा विश्वनाथ से भारत की अखंडता और सुरक्षा के लिए प्रार्थना की गई।
शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने शस्त्र पूजन किया। शास्त्रोक्त विधि से समारोह को संपन्न कराया गया। इस दौरान भगवान शिव के त्रिशूल, परशु, तलवार और धनुष का पूजन किया गया। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि दशहरे पर भगवान राम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की। शस्त्र पूजन के माध्यम से हम शस्त्रों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं और उन्हें धर्म, सुरक्षा और सद्भावना के लिए उपयोग करने की प्रेरणा लेते हैं। समारोह के दौरान शास्त्रों की विधिपूर्वक पूजा की गई। लोगों ने भारत की अखंडता और सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। इस आयोजन ने न केवल सांस्कृतिक धरोहर को सहेजा, बल्कि समाज में एकता और जागरूकता का संदेश भी दिया।
अन्नपूर्णा मंदिर में महंत शंकर पुरी ने किया शस्त्र पूजन
अन्नपूर्णा मठ मंदिर में ध्वज और शस्त्र की पूजा विधि विधान से संपन्न हुई। इस पर्व पर भगवान राम की पूजा के साथ विजय पताका और शस्त्र पूजा का विधान है। प्राचीन काल से राजा, महाराजा और साधु संतों द्वारा की जाने वाली शस्त्र पूजा आज तक चली आ रही है। महंत शंकर पुरी ने बताया कि मंदिर में ध्वज और शास्त्र की पूजा कई दशकों की परंपरा है। विजयादशमी पर्व पर शस्त्र की पूजा करने पर पूरे वर्ष आंतरिक और बाहरी शत्रुओं पर विजय प्राप्ति का वरदान प्राप्त होता है। यही कारण है कि आम आदमी से लेकर भारतीय सेना दशहरे के दिन विशेष रूप से शस्त्रों का पूजन करती है।