विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अवनीश गौतम की अदालत ने 166 निःशुल्क फर्जी बोरिंग दिखाकर छह लाख 14 हजार रुपये गबन और भ्रष्टाचार के मामले में लघु सिंचाई विभाग, बलिया के तत्कालीन अवर अभियंता जगन्नाथ प्रसाद गुप्त को दोषी पाया है। अदालत ने अभियुक्त को सात वर्ष की सजा सुनाई है। 60 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। 62 वर्षीय अभियुक्त जगन्नाथ प्रसाद गुप्त अंबेडकर नगर के शहजादपुर का निवासी है।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान तत्कालीन सहायक राम आशीष राय का निधन हो गया था, जबकि आरोप सिद्ध न होने पर बोरिंग टेक्नीशियन धर्म देव तिवारी को बरी कर दिया गया।
विशेष लोक अभियोजक आलोक कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक प्रकरण बलिया जिले के छपरा विकास खंड का है। वित्तीय वर्ष 1989-90 में 1008 बोरिंग में से 166 नि:शुल्क फर्जी बोरिंग को असली दिखाकर छह लाख 14 हजार रुपये गबन हड़प लिए गए थे। इसमें चार लाख 72 हजार रुपये की स्टील पाइप और एक लाख 42 हजार की मजदूरी दिखाई गई। इस मामले में बलिया के कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था और चार जनवरी 2010 को आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किया गया। विचारण में अदालत ने लोक सेवक के पद पर रहते हुए आपराधिक कृत्य का दोषी पाया।