संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सुरक्षा घोटाले की फाइलें खंगाली जा रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेकर नए सिरे से जांच प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद कुलपति ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। विश्वविद्यालय में दो साल बाद भी सुरक्षा के नाम पर घोटाला करने वाले आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई है। कमेटी पर कमेटी बनती रही, रिपोर्ट दर रिपोर्ट तैयार होती रही, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। 2020 की कार्य परिषद के दौरान एक सदस्य ने भी इस मामले को सभी के सामने रखा था, उसके बाद मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। विश्वविद्यालय में सुरक्षा के लिए अनुबंधित की गई सुरक्षा एजेंसी के साथ मिलकर अधिकारियों ने लाखों रुपये का घोटाला किया गया था। इसमें ऑडिट टीम और विश्वविद्यालय की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता की बात कही थी। इलाहाबाद की ऑडिट रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसी को भुगतान में अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन का मामला सामने आया था। जांच समिति ने तत्कालीन विनयाधिकारी, सुरक्षाधिकारी, लेखानुभाग और सुरक्षा एजेंसी की संलिप्तता स्वीकारी थी। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि मामला पुराना है इसकी फाइलें निकलवाई जा रही हैं।