सावन के चौथे और पुरुषोत्तम मास के दूसरे सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में आस्था की अनवरत गंगा प्रवाहमान हो उठी। गलियों से धाम तक भक्तों का ऐसा रेला उमड़ा की काशी का कण-कण से बम-बम भोले का जयघोष गुंजायमान हो उठा। मंगला आरती से शुरू हुआ दर्शन पूजन और अभिषेक का सिलसिला अनवरत चलता रहा। शाम को पांच बजे तक पांच लाख से अधिक शिवभक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में दर्शन-पूजन और जलाभिषेक किया। बीती रात से ही कांवड़िए बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के लिए कतारबद्ध हो रहे थे।
मंगला आरती के बाद जैसे ही मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए तो रात भर से कतारबद्ध शिवभक्तों का जोश देखते ही बन रहा था। हर-हर महादेव, बोल-बम, काशी विश्वनाथ शंभू का जयघोष करते हुए कांविड़यों का रेला मंदिर परिसर में उमड़ पड़ा। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण ललिता घाट से प्रवेश बंद रहा।