संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बिहारीलाल शर्मा ने बृहस्पतिवार को गोयनका संस्कृत महाविद्यालय के पुस्तकालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक ज्ञान के संरक्षण में पुस्तकालयों के महत्व पर प्रकाश डाला। कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का खजाना है, जिसमें कई विद्वानों और ऋषियों का ज्ञान समाहित है। यह छात्र और शिक्षक दोनों के लिए एक मूल्यवान संसाधन है, जो उनके ज्ञान का विस्तार करने और उनकी समस्याओं का समाधान खोजने का एक साधन प्रदान करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुस्तकालय भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता।