अदालत में समर्पण करने के लिए वह अपने करीबियों के माध्यम से किसी अधिवक्ता से मुलाकात करने शहर की ओर जाएगा। इस सूचना के आधार पर सारनाथ थाने की आशापुर चौकी के प्रभारी अखिलेश वर्मा, दरोगा अजय यादव, हेड कांस्टेबल रामबाबू व रामानंद यादव और क्राइम ब्रांच के दरोगा मनीष मिश्रा ने घेराबंदी कर संजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, संजय सिंह जिला जेल में बंद समर सिंह के यूट्यूब चैनल के प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और मैनेजमेंट का काम देखता था। समर के लेनदेन संबंधी काम और वित्तीय मामलों में भी संजय की एक अहम भूमिका रहती है। इसी वजह से समर के चुनिंदा करीबियों में से संजय की गिनती होती है।
पुलिस की पूछताछ में संजय सिंह ने बताया कि आकांक्षा दुबे से उसकी सिर्फ एक बार मुलाकात हुई थी। आकांक्षा और उसके बीच कभी बातचीत भी नहीं होती थी। बीते 27 मार्च को मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह भूमिगत क्यों था? पुलिस के इस सवाल पर संजय ने कहा कि वह आज तक कभी कानूनी पचड़े में नहीं फंसा था। मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिली तो वह डर गया था। इसी वजह से वह घर और लखनऊ स्थित ऑफिस छोड़कर मोबाइल स्विच ऑफ कर इधर-उधर छुपता फिर रहा था।
वाराणसी के सारनाथ थाने में आकांक्षा की मां समेत अन्य लोग
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आकांक्षा दुबे की मौत की जानकारी पाकर सारनाथ थाने पहुंची उनकी मां मधु दुबे ने संजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। मधु दुबे के अनुसार, उनकी बेटी की मौत से दो दिन पहले संजय ने उसे फोन कर जान से मारने की धमकी दी थी। इससे आकांक्षा तनाव में थी।