मणिकर्णिका घाट से पंचकोशी यात्रा के लिए जाते महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरी व अन्य श्रद्धा
पुरुषोत्तम मास पर काशी के संत समाज ने विश्व कल्याण, आध्यात्मिक जागरण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पंचक्रोशी पदयात्रा का शुभारंभ किया। कैलाश मठ के महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद के नेतृत्व में निकली इस यात्रा ने नो फ्यूल का संदेश दिया। स्वामी आशुतोषानंद ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अनेक प्रकार के संकटों से गुजर रहा है। ऐसे समय में सनातन संस्कृति, तप, जप और साधना ही मानवता को नई दिशा प्रदान कर सकती है। कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री की अपील से प्रेरित होकर संत समाज ने भी यह संकल्प लिया है कि समाज को आध्यात्मिक चेतना एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ा जाए। उन्होंने स्कंद पुराण के काशी खंड का उल्लेख पंचक्रोशी परिक्रमा के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि भगवान विष्णु ने अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास भी घोषित किया है। इस माह में किए गए जप, तप, व्रत, दान और साधना का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यात्रा का पहला पड़ाव कंदवा पर विश्राम किया। संवाद