इस बार रंगोत्सव पर काशी के अधिपति बाबा विश्वनाथ के गौने की बारात अनूठे अंदाज में निकलेगी। चांदी के राजसी सिंहासन पर बाबा जब गौना कराने निकलेंगे, तब विश्वनाथ गली अबीर-गुलाल की बौछार से सराबोर हो जाएगी। उन क्षणों के साक्षी देश के कोने-कोने से आए भक्तों के साथ ही तमाम विदेशी मेहमान भी बनेंगे। मौका होगा 19 मार्च को रंगभरी एकादशी का। इस मौके पर बाबा गौना कराने के लिए खादी सिल्क की पोशाक में निकलेंगे।
काशी में रंगभरी एकादशी से इस बार देश भर के भक्तों को स्वदेशी अपनाओ का संदेश दिया जाएगा। इस परिकल्पना को साकार करने के लिए बाबा को खादी की पोशाक धारण कराई जाएगी। इसके लिए खादी सिल्क की पोशाक सिलने के ऑर्डर दे दिए गए हैं। सेहरा बांधने के लिए राजा दरवाजा में शाही पगड़ी बनवाई जा रही है। शाही पगड़ी और खादी की पोशाक में बाबा सपरिवार निकलेंगे। रजत प्रतिमाओं के इस अनूठे स्वरूप में बाबा के बाएं माता पार्वती और उनकी गोद में भगवान गणेश विराजेंगे। बाबा की जटा में प्रतीक के तौर पर गंगा उलझी नजर आएंगी।
इस रंगोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसमें करीब पांच कुंतल से अधिक अबीर-गुलाल कुछ मिनटों में ही उड़ा दिया जाएगा। महंत डॉ. कुलपति तिवारी के घर से शाम पांच बजे बारात निकलने के साथ ही अबीर-गुलाल की बौछार शुरू हो जाएगी। महंत ने बताया कि इस मौके को संगीतमय बनाने के लिए भोजपुरी कलाकार भी मंच सजाएंगे। पूर्वी-छपरहिया के साथ ही दादरा की धुनों से बाबा के गौने के उत्सव को गुलजार किया जाएगा।