बीएचयू के पत्रकारिता और जन-संप्रेषण विभाग में सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने कहा कि एआई आपका प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि आपका सहयोगी शोधकर्ता है। हर नई जानकारी शोध नहीं होती, बल्कि शोध एक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और निष्पक्ष प्रक्रिया है जिसमें वस्तुनिष्ठता, विश्वसनीयता और प्रामाणिकता स्पष्ट रूप से दिखनी चाहिए। वह मीडिया रिसर्च इन द एज ऑफ एआई विषय पर एक विशेष व्याख्यान में मुख्य अतिथि के तौर मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि एआई से प्राप्त डेटा को अपने शोध-निर्देशक से अवश्य सत्यापित कराना चाहिए। पत्रकारिता जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ी हुई है और गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए सबसे पहले शोध समस्या की स्पष्ट पहचान आवश्यक है। सोशल साइंस रिसर्च को वैज्ञानिक पद्धति के साथ व्यवस्थित ढंग से किया जाना चाहिए। विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्र , आयोजन सचिव डॉ. बाला लखेंद्र, प्रो. अनुराग दवे, प्रो. शोभना नेरलिकर, डॉ. नेहा पांडेय, डॉ. धीरेंद्र राय आदि मौजूद रहे।