टाइपोग्राफी डे पर वाराणसी की लोक प्रचलित अक्षरांकन परंपरा पर बीएचयू के दृश्य-कला संकाय में शोध पत्र प्रस्तुत हुआ। फ्रॉम काशी स्ट्रीट टू डिजिटल टाइप शीर्षक पर शोधकर्ता अभिषेक वर्धन ने पत्र प्रस्तुत किया। शोध पत्र में वाराणसी के हाथ से लिखे और बहुभाषी अक्षरांकन को स्थानीय दृश्य और टाइपोग्राफिक ज्ञान के रूप में समझने का प्रयास किया गया है। इसमें देवनागरी अक्षररूपों, सामग्री, सतह और दृश्य संरचना का अध्ययन किया गया। साथ ही शहरी परिवेश में इनके प्रयोग को भी समझने का प्रयास किया गया। शोध में एनालॉग अक्षरांकन से डिजिटल डिजाइन तक के बदलाव को भी शामिल किया गया। इसके लिए दृश्य प्रलेखन, विश्लेषण, हस्तनिर्मित पुनर्रचना, दृश्य अमूर्तन और डिजिटल प्रयोग की प्रक्रिया अपनाई गई। इस शोध पत्र को दृश्य कला संकाय के प्राे. मनीष अरोड़ा और कानपुर के सीएसजेएम विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग की सहायक प्राध्यापक तनीशा वाधवान ने लिखा है।