ईश्वर तो एक ही है। हम बस अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। सभी को अपने-अपने धर्म में रहकर अपने भगवान की भक्ति करने की स्वतंत्रता है। धर्म हमें सिर्फ प्रेम करना सिखाता है नफरत करना नहीं। ये बातें काशी धर्म पीठाधीश्वर स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज ने कहीं। वह मंगलवार को अस्सी स्थित रामेश्वर मठ में पत्रकारों को संबाेधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर आपस में विवाद उचित नहीं है। काशी धर्म पीठाधीश्वर ने कहा कि कार्तिक मास तो ऐसे भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है लेकिन अगर इस कार्तिक मास में भगवान शंकर की नगरी काशी में रहकर भगवान विष्णु का पूजा आराधना और गंगा स्नान किया जाए तो इसका कई गुना फल मिलता है। भगवान शिव के आराध्य भगवान राम हैं और जो भी भक्त काशी में रहकर भगवान विष्णु का पूजन अर्चन करता है उस पर भगवान शंकर ज्यादा प्रसन्न होते हैं। उसे हर प्रकार का सुख प्रदान कर दुखों से मुक्ति दिलाते हैं।