वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा में शुक्रवार को तुलसीदास-नंददास जयंती समारोह हुआ। आज का परिदृश्य और रामचरितमानस की उपादेयता और भ्रमरगीत परम्परा व नंददास विषय पर मुख्य वक्ता बीएचयू हिंदी विभाग की डॉ. प्रीति त्रिपाठी ने कहा कि आज के समय में रामचरितमानस पर विचार करना स्थगित हो चुके मानवीय मूल्यों की वापसी है। विशिष्ट अतिथि डॉ. रविशंकार सोनकर ने कहा कि भ्रमर गीत की परंपरा प्राचीन काल से वर्तमान तक चली आ रही है। प्राचार्य प्रो. रचना श्रीवास्तव ने कहा कि भक्ति काल हिंदी साहित्य का महत्वपूर्ण दौर रहा है। तुलसीदास और नंददास इस काल के प्रमुख कवियों में हैं। प्रो. आशा यादव ने कहा कि रामचरितमानस कर्तव्य, साहस, सौहार्द, प्रेम और सहिष्णुता जैसे मानवीय मूल्यों की सीख देता है। डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव ने तुलसीदास कृत विनय पत्रिका के पदों का सस्वर गायन किया। संचालन जिज्ञासा मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सपना भूषण ने किया।