शाम को रथयात्रा के सामने प्रभु के रथ की पूजा एवं आरती होगी। इसके बाद पं. बेनीरामबाग से श्री पंचमुखी हनुमानजी की पूजा और आरती के बाद रथ निराला निवेश के लिए प्रस्थान करेगा। मध्य रात्रि के बाद ठाकुरजी के विग्रह को रथ पर विराजमान कराया जाएगा और श्रृंगार होगा।
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया 20 जून को आरती के साथ भगवान का दर्शन पूजन आरंभ हो जाएगा। प्रात: नौ बजे छौंका, मूंग चना, पेड़ा, गुड़ व देसी चीनी के शर्बत का भोग लगाया जाएगा। अपराह्न 12 बजे भोग व आरती के पश्चात पट बंद होंगे। अपराह्न में आरती के साथ दर्शन आरंभ होंगे। मध्यरात्रि में आरती के बाद पट बंद हो जाएंगे।
21 और 22 जून को भी दर्शन, पूजन और आरती का सिलसिला चलेगा। 22 जून की मध्यरात्रि के बाद पंट बंद हो जाएगा और कार से भगवान के विग्रह को अस्सी स्थित मंदिर पहुंचाया जाएगा। 23 जून से मंदिर में भगवान को सिंहासन पर विराजमान कराने के बाद आरती के साथ ही दर्शन भी आरंभ हो जाएंगे। वहीं रथ को शहीद उद्यान स्थित रथशाला में पहुंचाया जाएगा।