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मस्जिदों में पहुंचे एतकाफ करने वाले

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गाजीपुर। एतकाफ के साथ ही रमजान के तीसरे अशरे की शुरुआत सोमवार को हो गई। बाद नमाजे अस्र लोग मस्जिदों एतकाफ पर बैठे और शबे कद्र का एहतराम किया। एतकाफ में बैठने वाले अब दस दिन तक मस्जिद के एकांत में अल्लाह की इबादत में मशगूल रहेंगे। ईद का चांद देखकर वह घरों को लौटेंगे। सोमवार को पाक माह रमजान के तीसरे अशरे (जहन्नम से आजादी) की शुरुआत हुई। शहर के रौजा, कचहरी, विशेश्वरगंज, मिश्रबाजार, बरबरहना, कपूरपुर, रजदेपुर के साथ ही ग्रामीण इलाकों सैदपुर, कासिमाबाद, बहरियाबाद, दिलदारनगर, सुहवल, सेवराई, देवकली, मरदह, नंदगंज स्थित मस्जिदों में भी लोग बाद नमाजे अस्र मस्जिद में एकतकाफ के लिए बैठ गए। बहरियाबाद स्थित जामा मस्जिद के इमाम मौलाना शाहनवाज ने बताया कि हदीस में है कि पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद भी एतकाफ में बैठते थे। बताया कि एतकाफ मस्जिद में तन्हाई में बैठक कर अल्लाह तआला की इबादत करना है। अल्लाह एतकाफ करने वालों के गुनाह माफ फरमाता है और उनकी दुआओं को कुबूल करता है। बताया कि इसी अशरे में पांच शबे कद्र भी। इस एक रात का मरतबा हजार रातों के बराबर होता है। माहे रमजान की 21, 23, 25, 27 और 29 तारीख की रातें शबे कद्र होती हैं। एतकाफ करने वाले सोमवार की रात को पहली शबेकद्र हासिल करेंगे। रमजान में तीन अशरे पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नम से आजादी का है। मुसलमान दो अशरे पूरे कर चुके हैं। यानी 20 रोजे पूरे हो गए। अब तीसरे अशरे में बाकी बचे दस रोजे रखे जाएंगे और इबादतें की जाएंगी। इस आखिरी अशरे में बस्ती के कुछ लोग एतकाफ करने मस्जिद में जाते हैं। यानी की एकांत में अल्लाह की इबादत करते हैं और परिवार तथा दुनिया से अपने को अलग कर लेते हैं। यह दस दिन रमजान के महत्वपूर्ण दिनो में शामिल हैं।
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