रामनगर की रामलीला का 13वां दिन
- फोटो : अमर उजाला
गुरु वशिष्ठ ने भरत से संकोच छोड़कर अपनी बात कहने को कहा भरत अपनी माता की करनी पर ग्लानि करने लगे तो राम उन्हें समझाते हैं। जिसके बाद भरत ने राम से कहा कि राजतिलक की सब सामग्री साथ लाया हूं। इसे आप सफल कीजिए। मैं लक्ष्मण, शत्रुघ्न को वापस लौटा कर आपके साथ वन चलूंगा, अगर यह बात न ठीक हो तो आप सीता के साथ लौट जाइए हम तीनों भाई आपके बदले में वन चले जाएंगे।
यह सुनकर सभी देवता दुविधा में पड़ गए। तभी जनक के दूत ने गुरु वशिष्ठ को बताया कि जनक जी आए हैं। जनक श्रीराम और सीता को कुटिया में देखकर व्याकुल हो गए। जनक श्रीराम और भरत की महिमा सुनयना को सुनाने लगे। इतने में रात बीत गई। यही भगवान की आरती के बाद लीला को विश्राम दिया जाता है।
रामनगर की रामलीला का 13वां दिन
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रामलीला में इस वर्ष लगातार दुर्व्यवस्था देखने को मिल रही है। लीला स्थल पर गंदगी का अंबार कीचड़ एवं जलजमाव से लीला प्रेमियों में काफी आक्रोश है। लीला के तीसरे दिन जिम्मेदारों की उदासीनता लापरवाही रवैया के कारण ताड़का वध की लीला के स्थल को बदल कर मंचन किया गया। वही निषाद राज मिलन की लीला को भी जलजमाव के कारण गली में मंचन करना पड़ा। बुधवार को भी भरतकूप के पास बारिश के पानी इकट्ठा हो गया। लीला स्थल झील में तब्दील हो गया।
श्री गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित तुलसी घाट की रामलीला का शुभारंभ बुधवार को मुकुट पूजा के साथ हुआ। तुलसी घाट के तुलसी मंदिर के राम मंदिर में गणेश पूजन, राम, लक्ष्मण सीता और हनुमान जी के मुकुट की पूजा के साथ साथ पात्रों का भी पूजन हुआ। अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने श्रीराम, लक्ष्मण, सीता एवं हनुमान के पात्रों का पूजन करने के साथ-साथ मुकुट का भी विधि विधान से वेद मंत्रों के साथ पूजन अर्चन कर आरती की।
रामलीला में आज
रामनगर-जाल्हूपुर : भरत का चित्रकूट विदा होकर अयोध्यागमन, नंदीग्राम निवास
भोजूबीर : दशरथ सुमंत संवाद, दशरथ मरण, भरत आगमन
खोजवां : ताड़का सुबाहू वध, अहिल्या शाप मोचन, जनकपुर प्रवेश