धर्म हेतु अवतरेहु गोसाईं, मारेहु मोहि ब्याध की नाईं। मैं बैरी सुग्रीव पिआरा, अवगुन कवन नाथ मोहि मारा। हे गोसाईं। आपने धर्म की रक्षा के लिए अवतार लिया है और मुझे ब्याध की तरह (छिपकर) मारा। मैं बैरी और सुग्रीव प्यारा। हे नाथ! किस दोष से आपने मुझे मारा। भगवान राम कहते हैं हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्र की स्त्री और कन्या, ये चारों समान हैं। इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता।
सोमवार को रामनगर की रामलीला में बालि वध, सुग्रीव-राजतिलक, अंगद को युवराज पद, वर्षा वर्णन तथा माता जानकी की खोज में बंदरों के रवाना होने की लीला हुई। राम ने बालि को मारकर अपनी मित्रता निभाई और सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बना दिया। सीता की कोई खबर न पाकर राम क्रोधित हो गए और कहने लगे कि सुग्रीव राज पाकर हमें भूल गया है।