दुनिया के इकलौते और अनूठे राम रमापति बैंक से कर्ज लेने के लिए रामनवमी पर बुधवार को देशभर से श्रद्धालु काशी पहुंचे थे। श्रद्धालुओं को आठ महीने 10 दिन में सवा लाख रामनाम लिखने के लिए कर्ज दिया गया। उन्हें शर्त के मुताबिक गंगा जल से बनी स्याही से ही रामनाम लिखना होगा। लिखने के लिए श्रद्धालुओं को कागज, कलम के रूप में लकड़ी के क्रीज दिए गए।
त्रिपुरा भैरवी स्थित राम रमापति बैंक के 97वें वार्षिकोत्सव पर प्रभु श्रीरामलला का जन्मोत्सव उल्लास से मनाया गया। पं. ललित मिश्रा ने पंचामृत स्नान कराकर शृंगार किया और चांदी के सिंहासन पर झुलाया। मिश्री, मलाई, फल आदि का भोग लगाकर आरती हुई। बधाई गीत गूंजे और श्रद्धालुओं ने वस्त्र व खिलौने आदि चढ़ाए। सुबह से रात तक राम रमापति बैंक में मौजूद 19 अरब 45 करोड़ 65 लाख 50 हजार रामनाम और सवा करोड़ श्रीशिव नाम हस्तलिखित की परिक्रमा हुई। रोज दोपहर 3:30 बजे से शाम पांच बजे तक श्रीरामकथा होगी।
सुमित मेहरोत्रा ने बताया कि रामनवमी पर बिना किसी मुहूर्त के रामनाम का कर्ज दिया गया। कर्ज लेने वालों को नि:शुल्क कागज, कलम और सूखी स्याही दी गई। स्याही को गंगाजल से ही घोलकर रामनाम लिखना है। गंगाजल न मिलने पर नदी व कुएं के जल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर 500 लिखने होते हैं। कर्ज लेने वालों के लिए प्याज, लहसुन, मांस, मदीरा का सेवन बर्जित होता है।
ऑस्ट्रेलिया व कनाडा के ज्यादा हैं सदस्य
राम रमापति बैंक के 10 फीसदी सदस्य विदेशी हैं। सुमित ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दुबई आदि देशों के ज्यादा सदस्य हैं। इसके अलावा नेपाल, सिंगापुर, इंग्लैंड, अमेरिका आदि देशों से भी लोग यहां के सदस्य हैं।
वर्ष रामनाम की संख्या
2019-20 63.14 लाख
2020-21 4.22 करोड़
2021-22 1.25 करोड़
2022-23 2.75 करोड़
2023-24 3.31 करोड़