बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के एक साल पूरे होने पर बिजली कर्मियों ने बृहस्पतिवार को प्रबंध निदेशक कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान निजीकरण के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की। चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उचित निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज होगा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले बिजली के निजीकरण के चलते कर्मचारियों में नाराजगी है। बृहस्पतिवार को संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक शैलेंद्र दुबे की अध्यक्षता में विरोध तेज हुआ। उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री महाकुंभ की सफलता बताते हैं लेकिन वह जिस महाकुंभ की बिजली निजी कंपनी से चलाना चाहते थे वहां निगम ने सरकारी बिजली से रोशनी दी है। मीडिया सचिव अंकुर पांडेय ने बताया कि निगम को तत्काल प्रभाव से निजीकरण के लिए लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को वापस लेना चाहिए। इस दौरान मायाशंकर तिवारी, ओपी सिंह, राजेंद्र सिंह, वंदना पांडेय आदि ने अपनी आवाज बुलंद की।