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शहनाई की धुन पर पेश किया आंसुओं का नजराना

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कहती थी शिरी खुले सर हाय ऐ हुसैना, किस शान से मेहमां मेरे घर आए हुसैना...की धुन जब शहनाई पर गूंजी तो हर आंख नम और दिल गमगीन हो उठा। बृहस्पतिवार को भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की रवायत को आगे बढ़ाते हुए उनके पौत्र आफाक हैदर ने चांद की पांचवीं तारीख को दरगाह ए फातमान में शहनाई पर आंसुओं का नजराना पेश किया।
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नौचंदी जुमेरात पर दरगाह ए फातमान में हजरत अली के रौजे से अलम उठाकर अजादारों ने नौहा मातम किया। आफाक हैदर ने उस्ताद की रवायत के अनुसार शहनाई पर मातमी धुन के जरिए नजराना पेश कर हर किसी को गमगीन कर दिया। जाकिर हुसैन, नाजिम हुसैन, नासिर अब्बास और अखलाक हुसैन ने सहयोग किया। संचालन शकील अहमद जादूगर ने किया। हाजी फरमान हैदर ने कहा कि जुल्म और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाली आवाज को ही मोहर्रम कहते हैं। छत्ता तले गोविंदपुरा से अलम का कदीमी जुलूस अंजुमन हैदरी के जेरे इंतजाम उठाया गया। अर्दली बाजार में हाजी अबुल हसन के निवास पर छह महीने के शहीद अली असगर का झूला उठाया गया। अंजुमन इमामिया ने नोहा मातम किया। जुलूस मास्टर जहीर के इमामबाड़े पर समाप्त हुआ। रामनगर में महाराज बनारस के मन्नत का जुलूस उठाया गया। दुलदुल के जुलूस को एहले सुन्नत हजरात ने उठाया। सभी धर्मों के लोगों ने शिरकत की। नौचंदी जुमेरात पर इमामबाड़ा मीर गुलाम अब्बास अर्दली बाजार, चौहाट्टा लाल खान, सदर इमामबाड़ा पर भी अलम उठाकर नौहा मातम किया गया।
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