कोयला व्यवसायी नंद किशोर रुंगटा के भाई महावीर प्रसाद रुंगटा को धमकाने के 26 साल पुराने मुकदमे में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम (एमपी-एमएलए) उज्जवल उपाध्याय की अदालत ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मुख्तार अंसारी को 12 अक्तूबर को पेश करने का आदेश दिया है। वहीं, मुख्तार अंसारी के एक जमानतदार मंसूर अहमद अंसारी ने जमानत बंधपत्र से उन्मोचित करने की अदालत से अपील की है। कहा कि अपरिहार्य कारणों से वह मुख्तार अंसारी के जमानत बंधपत्र से उन्मोचित होना चाहता है।
सुनवाई के दौरान शुक्रवार को मुख्तार अंसारी की ओर से इस आशय का प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया कि नंद किशोर रुंगटा के अपहरण के मामले में 27 जून 2000 को अदालत द्वारा दिए गए निर्णय की प्रमाणित प्रति दाखिल करना है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से निर्णय की प्रति अभी उसे प्राप्त नहीं हुआ है। मुकदमे की कार्रवाई को स्थगित कर निर्णय की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए समय देने की मांग की गई।
रवीन्द्रपुरी कॉलोनी निवासी कोयला व्यवसायी नंद किशोर रुंगटा का 22 जनवरी 1997 को अपहरण किया गया था। अपहरण के मुकदमे की विवेचना चल रही थी। पांच नवंबर 1997 की शाम नंद किशोर रुंगटा के भाई महावीर प्रसाद रुंगटा के लैंडलाइन नंबर पर कॉल कर धमकी दी गई कि अपहरण कांड में पुलिस अथवा सीबीआई में पैरवी मत करना, नहीं तो बम से उड़ा दिया जाएगा। महावीर प्रसाद की तहरीर पर एक दिसंबर 1997 को भेलूपुर थाने में मुख्तार अंसारी के खिलाफ धमकाने का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने विवेचना पूरी कर तीन जुलाई 1998 को मुख्तार अंसारी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। इस मामले में मुख्तार अंसारी को छह अगस्त 1999 को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। दो जमानतदार मंसूर अहमद अंसारी और रिजवान ने जमानत बंधपत्र अदालत में प्रस्तुत किए थे।