आंगनबाड़ी के 5-6 साल के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रधानाचार्य और शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए बुधवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान सारनाथ के सभागार में बैठक हुई। इसमें सभी को एक दिन का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण अरविंद कुमार सिंह और राजीव कुमार सिंह ने दिया। डायट प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला ने कहा कि छोटे बच्चों के साथ कार्य करते समय छोटा बच्चा बनकर ही उनको बेहतर तरीके से सिखाया जा सकता है। स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम फेज 1, 15 दिसंबर से 31 मार्च के बीच कुल 3 महीने संचालित किया जाएगा। इसमें बच्चों का बेसलाइन और एंड लाइन आंकलन भी होगा। उन्होंने बताया कि स्कूली शिक्षा में फाउंडेशनल स्तर की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी के अंतिम वर्ष के बच्चों (5 से 6 वर्ष) के लिए स्कूल रेडीनेस फेज 1 चलाया जाएगा। इसमें सभी लोकेटेड आंगनबाड़ी के 5 से 6 वर्ष के बच्चों को स्कूल रेडीनेस फेज 1 के तहत कक्षा एक के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी उस स्कूल के प्रधानाध्यापक, नोडल शिक्षक, ईसीसीई एजुकेटर और आंगनबाड़ी कार्यकर्तायों को दी गई है। उन्हें इसके लिए जिलास्तर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। कुल 220 संकुल स्तरीय संदर्भदाता तैयार किए गए हैं जो अपने संकुल में सभी को लोकेटेड आंगनबाड़ी वाले स्कूल के प्रधान अध्यापक को एक दिन का प्रशिक्षण देंगे। संयोजन डीसी प्रशिक्षण प्रमोद कुमार गुप्ता ने किया।