आए दिन खतरे का सबब बन रहे कुओं को ढका जाएगा। जिले की चार तहसीलों में ऐसे 1799 कुओं को चिह्नित किया गया है। सबसे ज्यादा 1105 कुएं दुद्धी तहसील क्षेत्र में हैं।
इनमें से अधिकांश कुएं अनुपयोगी भी हो चुके हैं तो कई ऐसे हैं, जो जमीन के बराबर में आ चुके हैं। इनमें अक्सर किसी के गिरने या डूबने की घटनाएं हो रही हैं। जिले के पहाड़ी और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट हमेशा से रहे हैं।
ऐसी दशा में गहरे कुएं ही पानी का स्रोत बनते हैं। जगह-जगह गहरे हजारों कुएं खोदे गए थे। प्रचंड गर्मी में भी इन कुओं का पानी खत्म नहीं होता। पेयजल के अब अन्य स्रोत सक्रिय होने के बाद ज्यादातर कुओं का उपयोग नहीं हो रहा या फिर उसमें हैंडपंप या मोटर पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है।
गहरे और खुले कुएं अक्सर हादसे का कारण बन रहे हैं। पिछले दो माह में ही कुएं में गिरने और डूबने से दस से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इससे पहले भी कई घटनाएं हुई हैं। सुरक्षा घेरा या चबूतरा न होने से कुओं में अक्सर पशुओं के गिरने की घटनाएं भी होती रहती हैं।
कुओं को ढकने में औसतन 45-50 हजार रुपये तक खर्च किया जाएगा। जिले में कराए गए सर्वे के दौरान कुल 1799 ऐसे खुले कुएं चिह्नित किए गए हैं, जिनका उपयोग काफी कम होता है। प्रस्ताव भेजा गया है, जल्द ही बजट के साथ कार्य की मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
कहां-कितने कुएं::
दुद्धी: 1105
घोरावल: 320
रॉबर्ट्सगंज: 292
ओबरा: 82