रामरंग क़ी परम्परा मे दीक्षित तरुण कलाकार प्रणवशंकर ने गंगा ।
सुबह-ए-बनारस में सोमवार को तरुण कलाकार प्रणव शंकर ने गायन सुरों से सावन की फुहारों की शीतलता का एहसास कराया। शुरुआत राग अहीर भैरव में विलंबित एकताल में निबद्ध रामरंग की बंदिश से की। बोल थे- समझ मन बावरे...। द्रुत तीन ताल में निबद्ध बंदिश- सांवरे जागो भई भोर... की प्रस्तुति दी। द्रुत एकताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे- कहा मान ले मोरा...। राग काफी में निबद्ध टप्पा को सुनाकर अपनी साधना को प्रमाणित किया। समापन भजन- बीत गए दिन भजन बिना रे... से किया। तबले पर अभिनव नारायण आचार्य, संवादिनी पर सौरभ कश्यप और तानपूरे पर करणवीर चौहान ने संगत की। कलाकार को प्रमाणपत्र सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार ने दिया। डॉ. रत्नेश वर्मा ने स्वागत किया। संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया।