वाराणसी। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मरीजों के इलाज करने वाले डॉक्टरों के लिए राहत भरी खबर है। अब जिस पीपीई किट को पहनकर डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे है दोबारा उसे उपयोग में लाया जा सकता है। आईआईटी बीएचयू में हाल ही में हुए एक शोध में इसके सार्थक परिणाम आए हैं जिसके बाद इसे पेटेंट कराने की तैयारी भी चल रही है। आईआईटी बीएचयू में स्कूल ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मार्शल ने अपने दो छात्रों जूही जायसवाल और आशीष कुमार के साथ मिलकर एक ऐसा इलेक्ट्रोड ऑटोक्लेव सिस्टम तैयार किया है जिसकी मदद से मरीजों के इलाज के लिए पहने जाने वाले पीपीई किट को स्टरलाइज किया जा सकता है। डॉ.मार्शल ने बताया कि फिलहाल उन्होंने इस सिस्टम से रेनकोट पर शोध किया है जिसमें बैक्टीरिया आने पर उसे दूर करने में सफलता मिली है। बताया कि इस पर आधारित रिसर्च पेपर पब्लिश होने के बाद आईआईटी की ओर से इस तकनीक को पेटेंट कराने के की प्रक्रिया शुरू हो गई है।