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खेल में शारीरिक स्थिति, उम्र और लिंग मायने नहीं : दीपा मलिक

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किसी भी खेल में प्रतिभा दिखाने के लिए शारीरिक स्थिति, उम्र और लिंग कोई मायने नहीं रखता इसके लिए मजबूत इरादों की जरूरत होती है। उक्त बातें बुधवार को पैरा ओलंपियन दीपा मलिक ने बनारस में पहले दिव्यांग स्पोर्ट एकेडमी के स्थापना के दौरान कही। पद्मश्री दीपा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से देश में सभी खेल और खिलाड़ियों के प्रति लोगों का नजरिया बदला है। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल पुरस्कार करके देश के खिलाड़ियों का सम्मान बढ़ाना एक बड़ा उदाहरण है। सामान्य के साथ दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए काफी कुछ किया जा रहा है। जिसमें दिव्यांग स्पोर्ट्स एकेडमी शामिल है। बनारस सहित पूर्वांचल के दिव्यांग खिलाड़ी आगामी 2024 के पेरिस पैरालंपिक की तैयारी कर सकेंगे। पुष्पा खन्ना मेमोरियल निरोग ग्राम के संयोजन से संत चिंतामणि दिव्यांग स्पोर्ट्स एकेडमी काशी के शुभारंभ के दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता मंत्री अनिल राजभर ने की। अनिल ने कहा कि लखनऊ में दिव्यांग जनों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम का निर्माण किया गया है। बनारस में भी खिलाड़ी आधुनिक व्हीलचेयर पर मुक्केबाजी, तीरंदाजी, एथलेटिक्स और वालीबाल जैसे कई खेलों का अभ्यास कर सकेंगे। एकेडमी के उद्घाटन के दौरान मुख्य रूप से डॉ. सहगल, डॉ. सुनील मिश्रा, डॉ. नीरज खन्ना, मदन मोहन वर्मा, सुमित सिंह कई लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. उत्तम ओझा ने किया।
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