बीएचयू कला संकाय के भारतीय भाषा विभाग की ओर से हुई कार्यशाला में प्रतिभागियों को तमिल ग्रंथ कोंड्रेई वेंदन का अनुवाद बताया जाएगा। 19 मार्च तक चलने वाली कार्यशाला का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने किया। मुख्य वक्ता बीएचयू इतिहास विभाग के प्रो. ए गंगाधरन ने कहा कि कोंड्रेई वेंदन मुख्यतः बच्चों और युवाओं के लिए रचित एक काव्य है। इसका उद्देश्य उनमें नैतिक मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने इसके ऐतिहासिक और सामाजिक-आर्थिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए इसके अनुवाद की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि अव्वैयार की कोंड्रेई वेंदन जैसे प्राचीन ग्रंथ बुजुर्गों के प्रति सम्मान, शिक्षा के महत्व और ईमानदारी जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का प्रतिपादन करते हैं। इस दौरान कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल, प्रो. दिवाकर प्रधान मौजूद रहे। ब्यूरो