आर्य महिला पीजी कॉलेज में चल रही पांच दिवसीय राष्ट्रीय गायन कार्यशाला के पहले और दूसरे दिन प्रतिभागियों ने ध्रुपद गायन की बारीकियों को समझा। पद्मश्री पं. ऋत्विक सान्याल ने प्रतिभागियों को राग, स्वर, आलाप और लयकारी का व्यावहारिक अभ्यास कराया। उन्होंने ध्रुपद की पारंपरिक गायन शैली और डागर बानी की विशेषताओं से भी परिचित कराया। पहले दिन पं. ऋत्विक सान्याल ने पहले दिन राग भूपाली में नोम-तोम आलाप से शुरुआत की। दूसरे दिन राग तोड़ी में डागर बानी की नोम-तोम आलापचारी का अभ्यास कराया गया। पं. सान्याल ने ठाह, दुगुन और चौगुन लय में अभ्यास करने की विधि बताई। उन्होंने प्रकट और गुप्त स्वरों की अवधारणा भी समझाई। कार्यशाला में पखावज पर शुभम गुजराती ने और तानपुरा पर गोपी और स्नेहा ने संगत की। मौके पर महाविद्यालय की प्रो. अनामिका दीक्षित, डॉ.जया रॉय, डॉ. शैल पांडेय, डॉ. शुचि रहीं। संचालन अंशिका तिवारी ने किया।