मणि मंदिर के चौथे प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पर चल रही पंचक्रोशी यात्रा बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ बुधवार को पूर्ण हुई। धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के सानिध्य में आयोजित यह यात्रा ब्रह्म मुहूर्त में कपिलधारा स्थित कपिलेश्वर महादेव मंदिर से निकली।
पैदल तीर्थ यात्रियों का जत्था स्वामी शंकर देव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के साथ गंगा वरुणा के संगम स्थल सराय मोहना स्थित जौ विनायक पहुंचा। पूजन अर्चन के बाद नाव से मणिकर्णिका घाट पर यात्रा ने विश्राम लिया। गंगा पूजन के बाद चक्रतीर्थ में आचमन पूजन किया। इसके बाद भक्तों की टोली ज्ञानवापी स्थित व्यासपीठ पहुंची जहां वैदिक आचार्य ने सभी भक्तों का संकल्प पूर्ण कराया। इसके बाद धर्मसंघ पीठाधीश्वर के निर्देशन में भक्तों ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन किया। मां अन्नपूर्णा, साक्षी विनायक, बाबा काल भैरव मंदिर में विधिवत दर्शन पूजन कर यात्रा समाप्त हुई। इस अवसर पर धर्मसंघ महामंत्री पंडित जगजीतन पांडेय, मनोहर लाल अरोड़ा, बलदेव शर्मा, राजमंगल पांडेय, वीरभान अरोड़ा सहित विभिन्न प्रांतों से आए सैकड़ों भक्त शामिल रहे।
महादेव की कृपा से ही संभव है पंचक्रोशी यात्रा
मणि मंदिर में आयोजित कथा में प्रवचन करते हुए धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि काशी के धार्मिक महात्म्य को बताने वाली यह पंचक्रोशी यात्रा देवाधिदेव महादेव की कृपा से ही संभव है। बिना उनकी इच्छा के यह यात्रा पूरी कर पाना संभव नहीं है। इस अवसर पर वृंदावन से पधारे कथा व्यास आचार्य भरत पांडेय की श्रीशिवमहापुराण कथा का भी विश्राम हुआ।