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Varanasi News: विवेचक पर विभागीय कार्रवाई के आदेश, डीजीपी को भेजी जाएगी फैसले की प्रति

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आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी पति को कोर्ट ने किया बरी
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संवाद न्यूज एजेंसी

वाराणसी। सिगरा थाना क्षेत्र में 2018 में विवाहिता की मौत के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार की अदालत ने आरोपी पति अशोक मौर्य को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप साबित करने में असफल रहा। वहीं, विवेचना में गंभीर लापरवाही बरतने पर तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक गिरधारी यादव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। डीजीपी को फैसले की प्रति भेजने को कहा। मामला सिगरा थाने में 2018 में दर्ज हुआ था। मां निर्मला देवी की तहरीर पर पुलिस ने शुरुआत में हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि चंचल मौर्य की शादी 18 साल पहले अशोक मौर्य से हुई थी। आरोप था कि अशोक ने अपनी पहली शादी की बात छिपाई थी और वह चंचल के साथ मारपीट व प्रताड़ना करता था। 12 अगस्त 2018 को संदिग्ध परिस्थितियों में जलने से चंचल की मौत हो गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने हत्या की धारा हटाकर आत्महत्या के लिए उकसाने में आरोपपत्र दाखिल किया था। अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत अन्य चिकित्सीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों का अवलोकन किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार चंचल की मौत अत्यधिक जलने से उत्पन्न सदमे के कारण हुई थी। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन की ओर से पेश किए गए कई महत्वपूर्ण तथ्यों को आरोपी के समक्ष उसकी सफाई के लिए रखा ही नहीं गया। अदालत ने इसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के विपरीत माना। गवाहों के बयान में विरोधाभास मिला।
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