धोखाधड़ी और कूटरचना कर पैसा लेने के बावजूद जमीन न देने के मामले में अदालत ने एक आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सप्तम) वर्तिका शुभानंद की अदालत ने यह आदेश मंजू देवी के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया। आरोप है कि उन्होंने धर्मेंद्र मौर्य से 13 दिसंबर 2011 को एक लाख रुपये में घर के सामने स्थित 418 वर्गफीट जमीन खरीदी थी। राजस्व अभिलेखों में अपना नाम भी दर्ज कराया था। उसके बाद उन्हें कुछ और जमीन की आवश्यकता महसूस हुई तो धर्मेंद्र मौर्य से सामने वाली जमीन में शेष बचे हिस्से को खरीदने की इच्छा जताई। इस पर उसने एक मार्च 2015 को धर्मेंद्र मौर्य को 544 वर्गफीट भूमि के लिए तयशुदा पांच लाख रुपये में से डेढ़ लाख रुपये दिए। साथ ही सट्टा इकरारनामा भी कराया। दो सितंबर 2023 को धर्मेंद्र मौर्य उनकी खरीदी हुई जमीन पर अपना निर्माण कराने के लिए सामग्री गिरवाने लगा। उन्होंने विरोध किया तो धर्मेंद्र सहित अन्य लोग गालीगलौज करने लगे। पुलिस ने शिकायत नहीं सुनी तो अदालत की शरण ली।