पीड़ित रविंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि भेलूपुर पुलिस पहले दिन से ही हीलाहवाली कर रही है। मुकदमा दर्ज करने के लिए 8 दिन तक दौड़ाया। बयान तक ढंग से विवेचक ने नहीं लिया। लखनऊ की फोरेंसिक टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केस से संबंधित सभी का नार्को कराया जाए। इन सब के बावजूद विवेचक ने किसी भी साक्ष्य व सबूत की जरूरत नहीं समझी और मात्र 18 दिन में ही एफआर लगा दिया था।
रविंद्र के अनुसार मकान मालिक और उसके दोस्तों ने छत से गिरने पर नितेश के मौत का कारण बताया था। 40 फीट की ऊंचाई से गिरने पर शरीर की कोई भी हड्डी नहीं टूटी। मोबाइल फोन में खरोंच तक नहीं। मकान मालिक ने परिजनों, पुलिस, एबुंलेंस तक को सूचना नहीं दी। घटनास्थल पर परिजनों के पहुंचने से पहले राख क्यों डाली गई थी, घटनास्थल पर घड़ी, चश्मा, चप्पल मौजूद नहीं था। नितेश के कमरे का बिस्तर भी अस्तव्यस्त था।
भेलूपुर थाने से विवेचना बदलवाने के लिए मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई थी। डीजीपी ने 16 अगस्त को वाराणसी कमिश्नरेट के उच्चाधिकारियों को विवेचना बदलने का आदेश दिया। इसके बावजूद भी विवेचना नहीं बदली गई, बल्कि 18 अगस्त को विवेचक ने न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दिया।