डीएवी पीजी कॉलेज में शुक्रवार को कार्यस्थल पर महिलाओं को आने वाली समस्याओं पर खुलकर विमर्श किया गया। आईआईटी बीएचयू की डिप्टी रजिस्ट्रार (अकादमिक) मेजर निशा बलोरिया ने कहा कि सिर्फ दो या तीन फीसदी महिलाएं ही उन उच्च पदों तक पहुंच पाती हैं, जहां वे नीतिगत निर्णयों में भागीदार हों या स्वयं नीति निर्धारित कर सकें। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सेक्टर में महिलाओं को काम करना सबसे मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को सबसे पहले खुद के लिए लक्ष्य निर्धारित करना और स्वयं से प्यार करना सीखना होगा। कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने प्रशासनिक और नेतृत्वकारी पदों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तीकरण तभी होगा जब जड़ताओं से मुक्त होकर समान अवसर और सम्मान मिले। उपाचार्य प्रो. संगीता जैन ने कहा कि इंटरनल क्वालिटी सेंटर के अंतर्गत स्त्री विमर्श प्रकोष्ठ ने कार्य स्थल पर महिलाओं के लिए चुनौतियां और अवसर विषय पर ये संगोष्ठी की गई।