बीएचयू के मालवीय भवन में सात दिन की श्रीमद् भागवत कथा में कथा वाचक डॉ. पुंडरीक शास्त्री ने बताया कि भागवत वैष्णवों का परम धर्म है, पुराणों का तिलक है, ज्ञानियों का चिंतन है, संतों का मनन है और भक्तों का बंदन है और भारत की धड़कन है। श्रीमद् भागवत कथा श्रवण वही कर सकता है जिसके जीवन का सौभाग्य सर्वोच्च शिखर पर होता है। जिस पर भगवान की आतिशय कृपा होती है वही जीव भागवत की शरण में जाता है, भागवत भगवान का स्वरूप है। श्रीमद् भागवत वह शास्त्र है जिसमें बीते कल की स्मृति, आज का बोध और भविष्य की योजना है। प्रो. उपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि ये कथा रोज शाम 5 बजे से रात 7 बजे तक चल रही है। संरक्षक कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी हैं।