घटाओं की रिमझिम के बीच गायन और नृत्य की दिग्गज हस्तियों के बीच जुगलबंदी सोमवार की रात यादगार बन गई। कथक सम्राट पं. बिरजू महाराज की जाने माने ख्याल गायक पं. राजन मिश्र, साजन मिश्र की ठुमरी, होरी पर बेजोड़ जुगलबंदी ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह अद्भुत संयोग था जब होरी की बंदिश पर कथक नृत्य गुरु ने भावों-इशारों से जुगलबंदी की। यह संगीत निशा दुर्गाकुंड के हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय परिसर में शिवरात्रि संगीत महोत्सव के तहत की गई।
महोत्सव की दूसरी निशा की शुरुआत हुई भावना कयाल, स्मिता कोकरा और जान्हवी डोलिया के कथक नृत्य से। इन नृत्यांगनाओं ने शिव वंदना से आगाज किया। गायन गौरव मिश्र ने किया। इनके बाद पं. नरेंद्र मिश्र ने सितार पर राग हंसध्वनि की अवतारणा की। फिर शाश्वती सेन ने कथक पर शिव-पार्वती परिणय के भावों को सजाया। फिर बारी आई पं. राजन-साजन मिश्र की। इन्होंने राग झिंझोटी में झप ताल की बंदिश -महादेव महेश्वर की प्रस्तुति की। इसके बाद तीन ताल में -शंकर शिवदानी भोलेनाथ की प्रस्तुति की।
तबले पर गोपाल मिश्र ने संगत की। अंत में राजन-साजन की बंदिशों पर पं. बिरजू महाराज के कथक की जुगलबंदी शुरू होते ही तालियां गूंजने लगीं। सबसे पहले बिरजू महाराज के दादा पं. बिंदादीन की रचना -का मैं करूं देखो गारी देत कन्हाई के बोल पर राजन-साजन ने जब स्वर लगाया तब कथक नृत्य की थिरकन यादगार बन गई। भगीरथ जालान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर रमेश भाई ओझा, केशव जालान, कृष्ण कुमार जालान समेत तमाम गणमान्य लोग उपस्थित थे।