जिस कोख से जन्म लिया उसी मां को एक दरोगा ने छह घंटे तक ‘कैद’ में रखा। वृद्धा के कराहने की आवाज पर पड़ोसी इकट्ठा हुए और शोर शराबा किया। मंडुवाडीह पुलिस को भी इत्तला की गई। तब जाकर वृद्धा पुत्र की कैद से आजाद हुई। हंगामे की सूचना पर घर लौटे दरोगा ने पड़ोसियों से बदसलूकी की। मौकेे पर पहुंची पुलिस और लोगों को सफाई दी कि वह मां को घर में बंद कर दर्शन करने गया था। तीन दिनों में यह तीसरा मौका है जब एक और दरोगा की हरकतों के चलते खाकी वर्दी पर लोगों को अंगुली उठाने का मौका मिला है।
भुल्लनपुर की शिवनगर कॉलोनी में रहने वाले दरोगा की तैनाती लखनऊ पुलिस लाइन में है। कुछ दिन पहले वह 70 वर्षीय मां, पत्नी समेत लखनऊ से वाराणसी आया था। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि शनिवार की भोर में वह मां को घर में कैद कर कहीं चला गया। सुबह करीब छह बजे पड़ोस के एक युवक को दरोगा के घर से कराहने की आवाज आई। उसने देखा तो घर में ताला बंद था।
बाउंड्री पर चढ़ने के बाद उसने खिड़की से देखा तो एक कमरे में दरोगा की मां थीं। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। सुबह दस बजे मंडुवाडीह पुलिस पहुंची और दरवाजा तोड़कर महिला को बाहर निकाला। उन्हें एक पड़ोसी के घर भेजा गया। अपराह्न करीब एक बजे दरोगा अपनी पत्नी के साथ पहुंचा और पड़ोसियों से भिड़ गया। फिर हंगामा बढ़ता देख वह मां को लेकर कहीं चला गया। एसओ फरीद अहमद का कहना है कि दरोगा के अपनी मां को कैद करने की सूचना पर पुलिस गई थी। किसी ने तहरीर नहीं दी है।
दरोगा के पिता पीएसी में हवलदार थे। नौकरी में रहते हुए उनकी मौत हो गई थी। उनके बेटे को मृतक आश्रित कोटे से पुलिस की नौकरी मिली। आरोपी दरोगा की मां को पेंशन भी मिलती है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि दरोगा और परिवार के लोग मां से अच्छा व्यवहार नहीं करते। उनका ठीक से इलाज भी नहीं कराते।