बीएचयू में ओड़िशा की परंपराओं और खानपान को एक तराजू पर ताैला गया। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। वहां के भोजन कलिंग युद्ध, शिशुपालगढ़ और खारवेल से जुड़े हैं। जगन्नाथ मंदिर का विशाल रसोईघर भी विशेष है। बृहस्पतिवार को ओड़िया को जानें, ओडिशा को जानें: ओड़िया सांस्कृतिक विरासत की एक झलक कॉन्क्लेव के दूसरे दिन हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जीवन को महिला सशक्तीकरण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसमें आधुनिक समय में ओड़िया खाद्य परंपराओं के परिवर्तन पर चर्चा हुई। देबाशीष पटनायक ने कहा कि दलमा जैसे पारंपरिक व्यंजन आज डिजिटल माध्यमों के जरिये व्यापक पहचान प्राप्त कर रहे हैं। ओडिशा में भोजन केवल पोषण नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था की अभिव्यक्ति है। यह ऋतुओं, अनुष्ठानों और सामाजिक जीवन से गहराई से जुड़ी हैं। उन्होंने एंडुरी पीठा और घंटा तरकारी जैसे पारंपरिक व्यंजनों की भी खासियतें बताईं।