वाराणसी। आवास विकास परिषद की वर्ल्ड सिटी एक्सपो योजना के तहत भूमि के चिह्नांकन के बाद आपत्तियों में गड़बड़ी की शिकायतों के मद्देनजर लखनऊ से आई टीम ने बुधवार को मौके पर जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान दो गांवों से आईं आपत्तियों में जमीन पर पक्के निर्माण मौजूद होने की बात सही मिली। इस पर टीम के सदस्यों ने कहा कि इन जमीनों को छोड़ने पर विचार किया जाएगा। आवास विकास परिषद ने इस योजना के तहत भूमि विकास के लिए हरहुआं क्षेत्र के 10 गांवों की 457 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए चिह्नांकन किया है। काश्तकारों को नोटिस जारी करने के साथ ही आपत्तियां मांगी गईं। आवास विकास परिषद के सचिव नीरज शुक्ला की अध्यक्षता में गठित 10 सदस्यीय नियोजन समिति इन आपत्तियों पर वीडीए सभागार में सुनवाई कर रही है। इस बीच कुछ ऐसी शिकायतें भी मिलीं कि कुछ झूठी आपत्तियां डलवाई जा रही हैं। इस पर टीम ने बुधवार को दो गांवों रामसिंहपुर और प्रतापपट्टी में जाकर सत्यापन किया। दोनों गांवों से दो आपत्तियां पड़ी थीं कि जमीन पर निर्माण किए गए हैं। इसलिए जमीन छोड़ दी जाए। टीम को मौके पर निर्माण मिला। आवास विकास परिषद के प्रशासनिक अधिकारी आईके सिंह ने कहा कि जिन जमीनों पर पक्के निर्माण रहते हैं, अमूमन उन्हें छोड़ दिया जाता है। सत्यापन टीम में मुख्य अभियंता धर्मवीर सिंह, एडिशनल हाउसिंग कमिश्नर मनोज कुमार, अधीक्षण अभियंता केसी श्रीवास्तव आदि शामिल थे। मौसम का असर, 31 आपत्तियों पर हुई सुनवाई वीडीए सभागार में आयोजित नियोजन समिति की सुनवाई पर बुधवार को खराब मौसम का असर दिखा। आपत्तियों पर अपना पक्ष रखने के लिए कम संख्या में काश्तकार पहुंचे। दूसरे दिन 31 आपत्तियों पर ही सुनवाई हो सकी। हालांकि कुछ लोग बिना एंट्री कराए ही बाहर से लौटते दिखे।
ऐसी-ऐसी आईं आपत्तियां - - मुआवजा कम है, मुआवजा बढ़े तो जमीन देंगे - होटल, बरात घर, निजी मकान बनाया गया है - मुआवजा वर्गफीट में मिले तब जमीन देंगे - एक साथ दो हजार आपत्तियां लेकर पहुंच गए नेता जी आपत्तियों के निस्तारण में राजनीति भी शुरू हो गई है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि खुद को किसान नेता बताते हुए एक नेता मंगलवार को लगभग दो हजार आपत्तियां लेकर आवास विकास परिषद के कार्यालय पहुंच गए। इस पर आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने कहा कि आपत्ति व्यक्तिगत होती है, सामूहिक नहीं।