अजब कहानी प्रेम की... उत्तर आधुनिक समय में प्रेम के बदलते स्वरूप को हास्य-व्यंग्य के माध्यम से चित्रित करती है। यह प्रस्तुति बदलते सामाजिक परिवेश की पड़ताल तो करती ही है, मानव मन की अमूल्य अभिव्यक्ति प्रेम को भी समय की कसौटी पर कसने की कोशिश करती है। यह कहानी आपको अनूठे ढंग से हंसाते गुदगुदाते हुए आगे बढ़ती है।
सोमवार को समूहन कला संस्थान की ओर से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में नाट्य संध्या का आयोजन हुआ। शाकुंतलम सभागर में आयोजित नाट्य संध्या में प्रसिद्ध हास्य व्यंग्य लेखक सुभाष चंदर की कहानी चुटीले संवादों की गति द्वारा अंत तक आते-आते दर्शकों को हंसते-हंसते चिकोटी काटने का अहसास करा जाती है। सुभाष चंदर की कहानी प्रेम रंग का अलग पहलू उजागर करती है। मंचन की अनुकूलता की दृष्टि से कथा का आंशिक रूपांतरण और गीत वैभव बिंदुसार ने खूबसूरती से किया है। संगीत पक्ष में कुमार अभिषेक, मनोहर कृष्ण श्रीवास्तव ने लाजवाब संगीत दिया है। प्रकाश संयोजन से मो. हफीज नाटक का यथोचित वातावरण निर्मित करते हैं। कोरस गायन, कथा वाचन में मोहिनी कुमारी, रितिका सिंह और स्वयं निर्देशिका रिम्पी वर्मा ने प्रभावित किया। हारमोनियम वादन मनोहर कृष्ण श्रीवास्तव और रिदम वादन से राजन कुमार झा ने ठोस धरातल प्रदान किया। नवीन चंद्रा लवगुरु की भूमिका में, मनीषा प्रजापति ध्वनि प्रभाव में और मंचीय क्रियेटिव सपोर्ट में रविप्रकाश सिंह सराहनीय रहे। प्रेमी-प्रेमिका की भूमिका में रितिका सिंह और सुप्रसिद्ध रंगकर्मी राजकुमार शाह अपने अभिनय से हास्य की नई स्थितियों को जन्म देते हैं। जब अभिनेताओं के मन में कही गई बात भी दर्शकों के सामने प्रकट हो जाती है और लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते हैं। इस दौरान राजकुमार शाह, सुचरिता गुप्ता, प्रवीण कुमार गुंजन मौजूद रहे।