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सिर्फ कुंभ पर नहीं समय-समय पर होती रहे विद्वतजनों की मुलाकात

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श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने मंगलवार को संकट मोचन मंदिर में महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र से मुलाकात की। इस मौके पर काशी के विकास और शास्त्रों पर चर्चा हुई। इस मौके पर संकट मोचन महंत ने तुलसीदास की कृतियों के प्रसंगों को सुनाया। कैलाशानंद गिरी ने कहा अब विद्वतजनों की समय-समय पर मुलाकात होते रहनी चाहिए। अब शास्त्रार्थ परंपरा शुरू होनी चाहिए। कहा कि सिर्फ कुंभ पर ही संत मिलन नहीं होना चाहिए। काशी विद्वानों की नगरी है। महामंडलेश्वर ने कहा कि वे छात्र जीवन में राजघाट से संकट मोचन पैदल आते थे और 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करते थे। हनुमान जी की कृपा से उन्हें वाइ श्रेणी से वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली है। इस मौके पर भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी भी मौजूद रहे। इससे पूर्व साध्वी ऋतंभरा ने महंत संकट मोचन से मुलाकात की। काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के मौके पर बनारस पहुंची मुख्यमंत्रियों की पत्नियों ने संकट मोचन में हाजिरी लगाई।
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