वाराणसी में अस्सी घाट से राजघाट तक गंगा नदी में नहर निर्माण तथा बालू खनन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दो महीने के अंदर सचिव और जलशक्ति मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है। एनजीटी द्वारा गठित संयुक्त जांच समिति द्वारा कहा गया है कि भविष्य में गंगा में इस तरह के कार्य के लिए नमामि गंगे की सहमति तथा अधिक बालू ड्रेजिंग या उठान मामले में जिला सर्वे रिपोर्ट तथा पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट जरूरी होनी चाहिए।
एनजीटी की तीन सदस्यीय प्रधान पीठ न्यायमूर्ति एके गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख 21 अक्तूबर निर्धारित की है। अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि एनजीटी ने 18 जुलाई को आदेश पारित किया था। 22 जनवरी को एनजीटी में गंगा नदी में अवैध बालू खनन के मामले में याचिका दायर की गई थी।
एनजीटी ने 17 फरवरी को इस मामले में सुनवाई करते हुए नमामि गंगे, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण तथा जिलाधिकारी की अगुवाई में संयुक्त समिति का गठन कर अवैध बालू खनन के मामले में रिपोर्ट मांगी थी। गंगा नदी के पार रेती में अस्सी घाट से राजघाट तक नहर निर्माण में कुल 11 करोड़ 95 लाख रुपये खर्च किए गए थे।