अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व
- फोटो : अमर उजाला
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 मिनट से दोपहर 12:33 मिनट तक चलेगा। नवमी में हवन करने वालों के लिए दिन में 1:32 मिनट तक हवन करने का मुहूर्त है। हवन के लिए नवमी तिथि ही सर्वोत्तम है। निर्णय सिंधु के अनुसार नवरात्र व्रत का पारण पांच अक्तूबर को प्रात: काल 8:07 बजे तक किया जाएगा।
विजयादशमी के लिए अपराह्न व्यापिनी ग्राही का सिद्धांत है। इसलिए विजयादशमी भी चार अक्तूबर को 1:32 बजे के बाद मनाई जाएगी। विजयादशमी स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है और इसमें शमी पूजन और अपराजिता पूजन का विधान है। शस्त्र पूजन का मुहूर्त चार अक्तूबर को दोपहर में 1:58 बजे से लेकर 2:44 बजे तक है। माता जी का गमन चार अक्तूबर को तीसरे चरण में रात्रि में 10 बजे होगा।